करनाल . केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया केंद्र सरकार का बजट एक जुमले के अतिरिक्त कुछ नहीं है। यह बजट पहले बजटों की तरह भारत की जनता के साथ एक छलावा है । आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष महेंद्र राठी ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही है। राठी ने कहा कि वादे बड़े-बड़े पर धरातल पर कुछ नहीं। इस बजट में न तो बेरोजगार युवकों के लिए, न करौना की मार झेल रहे भारतीय नागरिकों के लिए, न ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए और न ही शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए कोई प्रावधान किया गया है। दो करोड़ प्रतिवर्ष नौकरियां देने वाली सरकार की घोषणाऐं भी 60 लाख पर सिमट आई है। वास्तविकता तो यह है कि बेरोजगारों को रोजगार देने की बजाय कोरे सपने दिखाए जा रहे हैं। क्या इन सपनों से उनका पेट भरेगा ? पढ़ लिख गए ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं को देश की रीड की हड्डी कहते बीजेपी नेताओं की जुबान नहीं थकती । परन्तु वर्तमान केंद्रीय सरकार ने रोजगार देने हेतु कोई योजना धरातल पर आज तक नहीं उतारी । पिछले 8 सालों से बीजेपी केंद्रीय सरकार जुमले सुना कर युवाओं को बहलाने, फुसलाने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री कई सालों से कहते आ रहे थे कि 2022 तक कोई ऐसा परिवार नहीं बचेगा, जिसका अपना पक्का मकान न हो। अब आखरी उम्मीद 2022 के बजट में भी ऐसा कोई प्रावधान दिखाई नहीं देता जिससे यह उम्मीद बनी रहे कि हर भारतीय गरीब को पक्का मकान मिल सकेगा। एक साल से अधिक सड़कों पर उतरे किसानों को कोई राहत नहीं दी गई है। कर्मचारियों के लिए टैक्स में कोई छूट नहीं दी गई और न ही कोई लाभकारी योजना उनके हिस्से में आई है। शेयर-सूचकांक बजट आते ही छाले मारकर ऊंचा उठा है जिससे स्पष्ट संकेत है कि यह बजट बड़े बड़े पूंजीपतियों के लिए लाया गया है। कारपोरेट सेक्टर का टैक्स रेट घटाया गया है। जबकि राहत जनता को दी जानी चाहिए थी। उल्टे महंगाई अपना रौद्र रूप ले कर आम जनता को सतायेगी । इस बजट के आने के बाद इसके दुष्प्रभाव शीघ्र ही दिखाई देने लगेंगे । जनता की पहले ही कमर टूट चुकी है । इस बजट से और टूट जाएगी और जनता त्राहि-त्राहि करने पर मजबूर होगी।
