भारत की तरक्की के दो मजबूत स्तंभ—निजी क्षेत्र और करदाता : नवीन जिंदल

0
2
naveen-jindal
naveen-jindal

संपादक विक्रम सिंह
-यह विधेयक देश के भविष्य के लिए हर नागरिक तक पहुंचेंगे लाभ
-राष्ट्र निर्माण का एक मजबूत स्तंभ है निजी क्षेत्र, राष्ट्र निर्माण में भागीदार करदाता को उसके योगदान पर होना चाहिए सम्मान
कुरुक्षेत्र, 24 मार्च। 
कुरुक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल ने आज लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 का जोरदार समर्थन करते हुए इसे एक परिवर्तनकारी और दूरदर्शी रोडमैप बताया, जो 140 करोड़ भारतीयों के भविष्य को आकार देगा। उन्होंने जोर दिया कि भारत की विकास गाथा करदाताओं और निजी क्षेत्र की संयुक्त शक्ति से संचालित हो रही है और दोनों ही राष्ट्र निर्माण के अपरिहार्य भागीदार हैं।
वित्त विधेयक को केवल एक वित्तीय अभ्यास से कहीं अधिक बताते हुए  सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि यह किसानों को सशक्त बनाने, युवाओं को सक्षम करने, महिलाओं की गरिमा बढ़ाने और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के माध्यम से समावेशी और सतत विकास की नींव रखता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी एक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य के लिए है, और इसके लाभ हर नागरिक तक पहुंचेंगे।
निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि यह देश में 80 प्रतिशत से अधिक रोजगार और 60 प्रतिशत से अधिक जीडीपी में योगदान देता है, साथ ही नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने बताया कि भारत का आईटी निर्यात 200 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, फार्मास्युटिकल क्षेत्र 200 से अधिक देशों की सेवा कर रहा है और देश में आज एक लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक मजबूत स्तंभ है।
सांसद नवीन जिंदल ने करदाताओं के प्रति सोच में बदलाव की भी आवश्यकता बताई और अधिक सम्मानजनक तथा नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। उन्होंने अनुपालन में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि जीएसटी करदाताओं की संख्या 1.5 करोड़ से अधिक हो चुकी है और वित्त वर्ष 2024-25 में सकल जीएसटी संग्रह 22 लाख करोड़ से अधिक रहा। उन्होंने कहा कि करदाता कोई संदिग्ध नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदार हैं। उनके योगदान का सम्मान होना चाहिए।
अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए सांसद नवीन जिंदल ने भारत की आर्थिक मजबूती की तुलना किसानों की दृढ़ता से की, जो चुनौतियों के बावजूद निरंतर कार्य करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बावजूद भारत ने मजबूत पुनरुद्धार दिखाया है। सतत विकास और जीवन की गुणवत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की वकालत की, ताकि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो, सब्सिडी का बोझ घटे और स्वस्थ खाद्य प्रणाली सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि विकास को केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में सुधार से मापा जाना चाहिए। हमें आंकड़ों से आगे बढकऱ यह देखना होगा कि हम क्या खाते हैं, जो हवा हम लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं, और जीवन की समग्र गुणवत्ता क्या है।
वित्त विधेयक के प्रावधानों का स्वागत करते हुए सांसद नवीन जिंदल ने कर व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुधारों का सुझाव भी दिया। इनमें परिवारों के लिए संयुक्त कर दाखिल करने की व्यवस्था, विवाद से विश्वास जैसी विवाद समाधान प्रणालियों को संस्थागत रूप देना, कर विवादों के त्वरित और संरचित समाधान को बढ़ावा देना, तथा कर नोटिसों को सरल, पारदर्शी और सम्मानजनक बनाना शामिल है।
अपने संबोधन के अंत में सांसद नवीन जिंदल ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुटता की अपील की, ताकि भारत को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि हमारे विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र निर्माण के मामले में हमें साथ आगे बढऩा होगा और वित्त विधेयक 2026 को अपना पूर्ण समर्थन दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here