होम्योपैथी उपचार से विटिलिगो मेलेनिन नामक रोग से ग्रस्त व्यक्ति हुआ ठीक।
विटिलिगो मेलेनिन (फूलबैरी) नामक बीमारी का होम्योपैथिक में है कारगर उपचार- नागरिक अस्पताल नारायणगढ़ की होम्योपैथी सैंटर में हो रहा है इस रोग का उपचार- डॉ. सोमा चक्रवर्ती।

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नारायणगढ़,    मात्र चार मास में होम्योपैथी उपचार से विटिलिगो मेलेनिन नामक रोग से ग्रस्त व्यक्ति हुआ ठीक। इस बिमारी से पीडि़त गांव हडबौन के एक रोगी का कहना है के वह पिछले ढेड वर्ष से इस बिमारी से पीडि़त था और वह इधर-उधर इलाज करवा कर थक चुका था। जब उसे होम्योपैथी पद्धति में इस रोग के उपचार की जानकारी मिली तो उसने नागरिक अस्पताल नारायणगढ़ में स्थित होम्योपैथी सैंटर में तैनात डॉक्टर सोमा चक्रवर्ती से सम्पर्क कर विटिलिगो मेलेनिन (फूलबैरी) रोग की दवाई खानी शुरू की। दवाई खाने के चार मास के अन्दर ही उसके चेहरे के दाग 100 प्रतिशत साफ हो गये है। उन्होंने इसके लिए डॉ0 सोमा का धन्यवाद करते हुए कहा कि होम्योपैथी पद्धति में असाध्य रोगों का इलाज भी सम्भव है।
         इस रोग के बारे में नारायणगढ़ नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डा. सोमा चक्रवर्ती ने बताया कि विटिलिगो मेलेनिन नामक त्वचा पिगमेट की एक बीमारी है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें त्वचा के रंगद्रव्य या रंग का नुकसान होता है। जो विभिन्न कारणों से हो सकता है।  विटिलिगो (फूलबैरी) त्वचा की समस्या नहीं है बल्कि त्वचा पर प्रतिबिम्ब के साथ ऑटोइम्यून बिमारी है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है तथा धीरे-धीरे बढती है।        होम्योपैथी विटिलिगों की रोकथाम के लिए बहुत अच्छा विकल्प है। उन्होने कहा कि दुर्भाग्य से ऐसे रोगी होम्योपैथी की ओर रूख तब करते है, जब अन्य उपचार उन्हें लम्बें समय तक राहत देने में विफल होते है। जबकि होम्योपैथी वास्तव में विटिलिगों के इलाज की उनकी पहली पसंद होनी चाहिए। नागरिक अस्पताल में संचालित होम्योपैथी सैंटर में विटिलिगो से ग्रसित मरीज आते है और होम्योपैथी उपचार के बाद काफी ठीक हुए है और कई ठीक हो रहे है। होम्योपैथी उपचार कारगर साबित हो रही है। क्योंकि यह मूल कारण का इलाज करता है। होम्योपैथीक का प्राथमिक उदेश्य रोग को आगे बढने से रोकना और मौजूदा सफेद दागों में पुन:रजकता को प्रोत्साहित करना है। रोग को आगे होम्योपैथिक दवाएं प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। कोई दुष्प्रभाव नहीं है। यह लम्बे समय तक चलने वाले परिणाम देती है।             विटिलिगो मरीज इसलिए अधिक चिंतित होते है कि पैच फैलने और आकार में वृद्धि नहीं हो खासकर चेहरे पर। कई रोगियों में यह तनाव, अवसाद, चिंता और कम आत्मसम्मान की ओर जाता है। होम्योपैथी इस उपचार के दृष्टिकोण को लेती है और रोगियों को समग्र रूप से ठीक करती है। नारायणगढ अस्पताल में कार्यरत डॉ0 सोमा चक्रवर्ती (बी.एच.एम.एस. गोल्ड मैडलिस्ट) ने कहा कि होम्योपैथी उपचार से कई मरीज ठीक होकर जब अपनी खुशी व्यक्त करते है तो बहुत अच्छा लगता है। 

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