संपादक विक्रम सिंह
पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर अब भारतीय बाजार पर दिखने लगा है। देश में पिछले 10 दिनों के भीतर तीसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बार ईंधन के दामों के साथ-साथ CN CNG की कीमतों ने भी आम जनता को तगड़ा झटका दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स और तेल कंपनियों द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें हैं।
महानगरों और बड़े शहरों में तेल के दामों में इस तरह उछाल आया है:
| शहर | पेट्रोल में बढ़ोतरी | डीजल में बढ़ोतरी | मुख्य प्रभाव |
| दिल्ली | ~87 पैसे/लीटर | ~91 पैसे/लीटर | सीएनजी की कीमतों में भी भारी इजाफा। |
| मुंबई व अन्य शहर | ~3 रुपये से ज्यादा (कुल बढ़ोतरी) | ~3 रुपये से ज्यादा (कुल बढ़ोतरी) | माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों पर असर की आशंका। |
बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजहें:
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पश्चिम एशिया संकट: इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) बढ़ने से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है।
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तेल कंपनियों पर दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की बढ़ती कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को लगातार अपने रिटेल रेट्स में बदलाव करना पड़ रहा है।
लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने की पूरी संभावना है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर ₹99.51 प्रति लीटर पहुंच गया है। डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। इसके दाम ₹92.49 पर पहुंच गए हैं।
इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में CNG की कीमतें 1 रुपएकिलो बढ़ गई हैं। इस बदलाव के बाद दिल्ली में CNG अब 81.09 रुपए किलो मिलेगी। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले सरकार ने 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए और फिर 18 मई को 1 रुपए बढ़ाए थे।
10 दिन में तीसरी बार बढ़ीं पेट्रोल और डीजल की कीमतें
ईंधन की कीमतों में 10 दिन में यह तीसरी बढ़ोतरी है। 4 दिन पहले 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। जबकि, 15 मई को भी कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया था।
अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…
मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।
खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।
बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।
क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं:
1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।
2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।
3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।
4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।
5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती















